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जल विद्युत परियोजनाओं पर सेस लगाने के मामले में हिमाचल के युवाओं को मिलेगी छूट 

चार सालों में पूरी होंगी गारंटियां
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जल विद्युत परियोजनाओं 

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं पर सेस लगाने के मामले में हिमाचल के युवाओं को छूट दी जाएगी। जिन युवाओं के एक या दो मेगावाट के प्रोजेक्ट हैं, उनकी आय देखने के बाद ही वाटर सेस लगाने पर विचार होगा। उन्हें छूट दी जा सकती।

उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन में जल विद्युत उत्पादन पर जल उपकर विधेयक 2023 को संशोधित करने का प्रस्ताव सदन के पटल पर रखा। इस पर चर्चा शुरू की गई।अग्निहोत्री ने कहा कि बिजली परियोजनाओं पर वाटर सेस लगाने से हिमाचल प्रदेश की आय में चार हजार करोड़ रुपये का इजाफा हो सकता है। उन्होंने इस विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर दो ऐसे राज्य हैं, जहां इससे आय हो रही है। हिमाचल इस संबंध में पहले ही देरी कर चुका है। इस बारे में कंपनियों से आग्रह है कि वे इसे जमा करने आगे आएं। बड़ी कंपनियों से पैसे लेने की बात है। जो पांच मेगावाट तक के प्रोजेक्ट हैं, उनके प्रति संवेदनशीलता बरती जाएगी।

भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने इस बारे में संशोधन की मांग की। उन्होंने कहा कि इस इस बारे में अध्यादेश लाने की जरूरत क्या थी। मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि रणधीर शर्मा से तो उम्मीद है कि वह तो पूंजीपतियों के साथ नहीं हैं। वह यह बताएं कि क्या पांच मेगावाट तक के प्रोजेक्टों को इस संबंध में राहत दी जा रही है या नहीं। घुमारवीं के विधायक राजेश धर्माणी ने कहा कि क्या बाहरी राज्यों को जो पानी दिया जा रहा है, उस पर भी सेस लगाया जा रहा है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि रणधीर शर्मा तो कानून की पढ़ाई कर चुके हैं। अध्यादेश क्यों लाया जाता है, वह इस बारे में जान सकते हैं। हिमाचल में बहता सोना है। हिमाचल प्रदेश में 172 बिजली परियोजनाओं को अपना पंजीकरण करना होगा।

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