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बिजली बोर्ड में स्मार्ट मीटरों की खरीद का विवाद एक बार फिर सीएम सुक्खू तक पहुंचा 

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बिजली बोर्ड 

बिजली बोर्ड में स्मार्ट मीटरों की खरीद का विवाद एक बार फिर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू तक पहुंच गया है। इस बार पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है और इसमें स्मार्ट मीटर प्रक्रिया को रोकने का आह्वान किया है। स्मार्ट मीटर से पहले ट्रांसफार्मर, लाइनों और स्टाफ को स्मार्ट बनाने की बात कही है, ताकि बोर्ड कर्मचारियों के साथ होने वाले हादसों को रोका जा सके। बिजली बोर्ड के लिए घाटे का सौदा करार देते हुए इस टेंडर को किसी भी सूरत में पूरा न करने की सिफारिश मुख्यमंत्री से की है। बिजली बोर्ड के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष ने स्मार्ट मीटर की इस प्रक्रिया पर कई सवाल भी उठाए हैं। बिजली बोर्ड के 50 हजार कर्मचारियों और पेंशनरों पर इस खरीद का बोझ पड़ेगा।

विद्युत बोर्ड में 2016-17 में इलेक्ट्रोमेकेनिकल मीटर को इलेक्ट्रॉनिक मीटर के साथ बदलने का अभियान शुरू किया था और आज तक इलेक्ट्रॉनिक मीटर को बदलने का काम पूरा नहीं हो पाया है। लाखों की संख्या में इलेक्ट्रोमेकेनिकल मीटर बदलने को हैं, वहीं लाखों डेड स्टॉप मीटरों को भी नहीं बदला जा रहा है। इसकी वजह से बिजली बोर्ड को करोड़ों रुपए का राजस्व हानि हो रही है। इलेक्ट्रॉनिक मीटर को बदलने में कुछ अधिकारियों ने 35-40-65 रुपए तक प्रति मीटर बदलने की लेबर दी है, जबकि कुछ जगहों पर 982 और 2562 रुपए तक प्रति मीटर बदलने के लिए अदा कर दिए हैं। अब बिजली बोर्ड को स्मार्ट मीटर से स्मार्ट बनाने के टेंडर की तैयारी की जा रही है, जबकि दस हजार का स्मार्ट मीटर लगाने से बोर्ड लिमिटेड लगभग 2600 करोड़ रुपए के कर्ज के बोझ के नीचे दब जाएगा और इससे बिजली बोर्ड को और इसके उपभोक्ताओं को कोई फायदा नहीं होगा।

जुगाड़ से चल रहा काम

बिजली बोर्ड का प्रबंधक वर्ग स्मार्ट मीटर लगाने से पहले बिजली बोर्ड के सब स्टेशन, ट्रांसफार्मर और लाइनों को स्मार्ट बनाने का काम करें और बिजली बोर्ड को स्मार्ट बनाने के लिए स्मार्ट मैन पावर मुहैया करवाएं। उन्होंने कहा कि 20 -25 साल पुराने संयंत्र विद्युत उपकेंद्रों में लगाए गए हैं। इन्हें बदलने की बजाय जुगाड़ से काम चलाया जा रहा है और यह व्यवस्था उपकेंद्रों में और फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए कोई भी अनहोनी को न्योता देने का काम कर रही है। उन्होंनेे मुख्यमंत्री से मांग की है कि स्मार्ट मीटरिंग की इस योजना को बंद करवा करके विद्युत उपकेंद्रों को स्मार्ट बनाने का काम किया जाए।

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