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कांगड़ा जिला में जनवरी माह से वयस्कों को लगेगा बीसीजी का टीका

घर-घर जाकर होगा सर्वे, तीन माह तक चलेगा अभियान

जिला कांगड़ा में व्यस्कों को टीबी से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से जनवरी महीने से टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान जिले में वयस्कों को जनवरी, फरवरी और मार्च तीन महीनों में बीसीजी का टीका लगाया जाएगा। यह जानकारी अतिरिक्त उपायुक्त सौरभ जस्सल ने बीसीजी टीकाकरण तथा रूटीन इम्यूनाइजेशन को लेकर उपायुक्त कार्यालय के सभागार में आयोजित जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक की अध्यक्षता करते हुए दी। उन्होंने बताया कि नवजातों के बाद बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) का टीका अब युवाओं को भी टीबी से सुरक्षित रखेगा।

आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर करेंगी सर्वे

एडीसी ने बताया कि बीसीजी का टीकाकरण अभियान चलाने से पहले जिले में सर्वे किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इसके लिए आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर पात्र वयस्कों की जानकारी प्राप्त करेंगी। जिसके संपन्न होने पर टीकाकरण कार्य शुरू करवाया जाएगा।

इन्हें लगेगा टीका

बीसीजी का टीका 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोग, जिन लोगों को पिछले पांच वर्षों में एक बार भी टीबी हुई हो, 60 वर्ष और उससे अधिक के बुजुर्ग, धूम्रपान करने वाले लोग, पिछले तीन साल के टीबी रोगियों के संपर्क में आने वाले लोग, मधुमेह पीड़ित के साथ-साथ 18 किलो प्रति वर्ग मीटर से कम बॉडी मास इंडेक्स वाले व्यक्ति भी शामिल हैं। उन्होंने बताया कि टीकाकरण से पूर्व व्यक्ति से लिखित सहमति ली जाएगी। उन्होंने बताया कि इन वर्गों में भी टीकाकरण स्वेच्छा के आधार पर ही होगा।

इन विषयों पर भी हुई चर्चा

बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा आगामी इंटेंसिफाइड मिशन इंद्रधनुष, यू-विन पोर्टल, एमआर एलिमिनेशन तथा रूटीन इम्यूनाइजेशन के बारे में चर्चा की गई। एडीसी ने सीएमओ, बीएमओ सहित उपस्थित अन्य स्वास्थ्य अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि कोई भी बच्चा टीकाकरण से न छुटे। उन्होंने सभी हितधारकों से भी यह आह्वान किया कि वह इस अभियान में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें।

टीबी से बचाव में होगा सहायक: विशेषज्ञ

इस दौरान मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. सुशील शर्मा, सलाहकार विश्व स्वास्थ्य संगठन डॉ. रविन्द्र और डॉ. उषा किरण, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेश गुलेरी, कार्यक्रम अधिकारी यूएनडीपी अविनाश तथा जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सूद सहित अनेक विशेषज्ञ उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने कहा कि यह टीका टीबी के उपचार नहीं अपितु उससे बचाव के लिए कारगर है। उन्होंने बताया कि हर व्यक्ति में टीबी के कीटाणु कुछ मात्रा में रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह गंभीर टीबी का रूप न ले इसके लिए बचाव के तौर में इसे सभी को लगवाना चाहिए।

यह रहे उपस्थित

इस अवसर पर चिकित्सा अधिकारी तथा विशेषज्ञों अलावा सभी बीएमओ और आयुर्वेद विभाग, वेलफेयर विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।

2. बीसीजी टीकाकरण को लेकर कार्यशाला आयोजित

इस बैठक से पूर्व सीएमओ कांगड़ा डॉ. सुशील शर्मा की अध्यक्षता में जोनल अस्पताल धर्मशाला के सभागार में बीसीजी टीकाकरण को लेकर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला कांगड़ा के सभी 13 स्वास्थ्य खण्ड के खण्ड चिकित्सा अधिकारी, ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर, वरिष्ठ तकनीशियन पर्यवेक्षकों सहित सभी संबंधित कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यशाला का संचालन सलाहकार विश्व स्वास्थ्य संगठन डॉ. रविन्द्र, डॉ. उषा किरण, एम.एस डॉ. राजेश गुलेरी तथा यूएनडीपी के कार्यक्रम अधिकारी अविनाश द्वारा किया गया।

इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुशील शर्मा ने बताया कि बीसीजी के टीकाकरण के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश भर के 6 जिलों को चुना है, जिसमें कांगड़ा जिला भी सम्मिलित है। उन्होंने बताया कि इस अभियान के मुख्य दो चरण हैं पहला इंटरवेशन यानी जहां टीकाकरण का कार्य चलेगा। दूसरा कंट्रोल यानी जहां पर टीकाकरण शुरू करने से पहले टीकाकरण के कार्य से जुड़े सभी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश सूद ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्रालय ने वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि अब तक टीबी की रोकथाम के लिए बच्चों को बीसीजी का इंजेक्शन लगाया जाता था। बीसीजी का टीका 14 साल तक असरदार होता है। इसीलिए अब उन सभी लोगों को यह टीका लगाया जाएगा, जिन्हें टीबी होने का खतरा है।

डॉ रविंदर ने बताया कि बीसीजी टीका टीबी की रोकथाम में कारगर और सुरक्षित है, क्योंकि यह टीका पहले ही नवजात शिशुओं को जन्म के बाद लगाया जा रही है। उसके बावजूद कुछ नियम के अंतर्गत यह मानदंडों को पूरा करने वाले लोगों को ही लगाया जाएगा।

डॉ. उषा ने बताया कि हिमाचल प्रदेश को टीबी मुक्त बनाने के लिए बीसीजी वैक्सीनेशन एक मील का पत्थर साबित होगी, जिसके दूरगामी परिणाम आएंगे। उन्होंने सब प्रतिभागियों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए आह्वान किया।

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