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9 दिसंबर 1997 को कांगड़ा के परागपुर गांव को मिला था हेरिटेज विलेज का दर्जा।। जानिए गांव के बारे में

देश के सबसे प्राचीन 560 साल पुराने गांव का जसवां रियायत की राजकुमार प्राग देई के नाम पर पड़ा था परागपुर नाम

नौ दिसंबर 1997 को देश के पहले धरोहर गांव परागपुर को तत्कालीन राज्य सरकार ने ऐतिहासिक गांव को दर्जा देने की अधिसूचना जारी की थी। यह गांव 560 साल पुराना है। इस गांव का नामकरण जसवां शाही परिवार की राज कुमारी प्राग देई के नाम से किया गया था। उस समय में परागपुर का क्षेत्र जसवां की रियासत का हिस्सा था, जिसका मुखिया 16वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में था। कांगड़ा जिला का यह गांव हिमाचल प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में एक है। यहां बनी पुरानी दुकानें, सड़कें और स्लेटपोश मिट्टी के कच्चे मकान आज भी मौजूद हैं। प्रागपुर में भारत के सबसे फाइनेस्ट हैरीटेज होटलों में से एक कोर्टज होटल भी है। यह गांव हैरीटेज गांव घोषित किया गया है।

ऐसे हुई खोज इस गांव की

राजकुमारी प्राग देई जसवां शाही परिवार की राज कुमारी थी। जसवां रियासत के शाही परिवार ने 17वीं शताब्दी की शुरुआत में कुथियाला सूद के नेतृत्व में पुरुषों के एक बैंड को तैयार किया और उन्हें अपने शाहीवंश की राजकुमारी प्राग जश्न मनाने के लिए एक उपयुक्त जगह खोजने का काम दिया गया। तब इस बैंड ने धौलाधार पहाड़ियों में बसे एक सुंदर गांव की खोज की। शाही परिवार ने इस उपयुक्त जगह माना और इस गांव विकास करके गांव का नामकरण रानी प्राग देई के नाम पर किया। आज कांगड़ा जिला में आने वाले इस गांव का नाम प्रागपुर यानी परागपुर है।

अद्भुत वास्तुकला और प्राचीन सौंदर्य के कारण मशहूर

परागपुर गांव को 9 दिसम्बर 1997 को राज्य सरकार ने अधिसूचना जानी करके धरोहर का दर्जा दिया था। यह गांव अपने अद्वितीय वास्तुकला और प्राचीन सौंदर्य के कारण मशहूर है। हिमाचल का धरोहर गांव परागपुर आज भी अपनी प्रचीनता के कारण पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है और सबसे पुराने गांव को देखने के लिए दूर दराज से पर्यटक यहां पहुंचते हैं लेकिन हेरिटेज विलेज घोषित होने के बावजूद इस गांव में मूलभूत सुविधाओं की काफी कमी है।

पहला खुला शौचमुक्त गांव होने का भी दर्जा 

60 के दशक में खुला शौचमुक्त परागपुर आज अपनी पहचान देश विदेशों तक बना चुका है यही कारण है कि हर साल लाखों विदेशी सैलानी इसकी सुंदरता को निहारने आते हैं। फिल्म जगत की कई हस्तियां यहां पर अपनी फिल्मों के शूट कर चुकी हैं। ऋषि कपूर, आमीर खान, प्रियांशु, हैजेल, नेहा धूपिया, राजपाल यादव, प्रीटी जिंटा जैसे नामी हस्तियां परागपुर में शूटिंग कर चुके हैं।

1947 से हर साल गणतंत्र दिवस पर फहराया जाता है तिरंगा

खास बात ये कि परागपुर बाजार के मध्य अटियाले पर 1947 से आज दिन तक हर साल शाह परिवार के सौजन्य से 26 जनवरी गणतंत्र दिवस पर तिरंगा झंडा फहराया जाता है, जोकि परागपुर के लोगों की देश भक्ति को दर्शाता है।

परागपुर में खास पर्यटन स्थल 

परागपुर से 16 किलोमीटर दूर कालेश्वर महादेव का मंदिर है। यह मंदिर प्राचीन स्मारकों और पौराणिक कथाओं के लिए जाना जाता है। बैसाखी के दिन यहां मेला लगता है। इस मंदिर का इतिहास चार सौ पुराना है। वहीं परागपुर का ताल भी पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है। यह ताल 1868 में बनवाया गया था। वहीं यहां 250 साल पुरान नेहरू भवन और राधा कृष्ण का मंदिर भी है।

 

 

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